8 Comments

  1. सर्दी से जुड़ी इस कविता से यह परिलक्षित होता है कि प्रकृति सदैव कवि गीता जी की सहचरी के रूप में कविता की ओट में अवस्थित है । कवि की दृष्टि का फलक अत्यंत विस्तार लिए हुए है।सीधे-सीधे काव्यात्मक शैली में प्रस्तुति दी है। अति सुंदर वर्णन।

  2. कविता की इतनी सुन्दर समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी । आपकी प्रेरणा देती हुई समीक्षा ने कविता मे जान ही डाल दी है
    बहुत-बहुत आभार सर

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