साथी

पलके तेरी झुकी थी,
ओठों पर था तुफान।
संग चलने का इरादा किया,
मुझ पर था एहसान।

इस कदर एक साथ में चलें,
हर मुश्किल हालात में चलें।
आई जितनी परेशानियाँ,
उन्हें कुचल हर हाल में चलें।

धीरे-धीरे ही सही,
वर्ष कई बीत गयें।
कई उलझनें भी आई,
कदम हमेशा टिक गयें।

जब भी मैं भुखा रहा,
तुम भी भुखी सोई थी।
ढ़ाढस बंधाकर तुमने,
हर दु:ख हमारा धोई थी।

तेरे जैसे साथी पाकर,
धन्य हुआ भाग्य हमारा।
तुझपर मैं लुटा दूँ,
अगले कई जन्म हमारा।

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