सुकूँ मिल रहा है

अब्सार आपके
समुन्दर हैं प्यार के,
सुकूँ मिल रहा है,
आपको निहार के।
प्रातः की बेला है
नई रोशनी है,
आप हो बगल में
और क्या कमी है।
सदा पास रहना
यूँ ही मुस्कुराना,
यही इक्तिजा है
यही कामना है।
अब्सार आपके
समुन्दर हैं प्यार के,
सुकूँ मिल रहा है,
आपको निहार के।

Comments

14 responses to “सुकूँ मिल रहा है”

  1. क्या बात है पांडेय जी, वाह

  2. Geeta kumari

    वाह वाह, सतीश जी ..उत्साह,उल्लास एवम् श्रृंगार रस से ओत-प्रोत अति सुन्दर काव्य रचना..।
    सरपट दौड़ती लेखनी को मेरा नमस्कार, अभिवादन सर..।

    1. आपके द्वारा की गई समीक्षा निश्चय ही उत्साहवर्धक है। आपको सादर नमस्कार, सादर आभार

    1. सादर धन्यवाद जी

  3. Pratima chaudhary

    Very nice lines

  4. वाह वाह, बहुत खूब

  5. बहुत बढ़िया

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