सुनहु जानकी मातु मैं

सुनहु जानकी मातु मैं
हूँ रघुवर का दास।
करता हूँ सेवा सदा
रहता चरनन के पास।।

Comments

9 responses to “सुनहु जानकी मातु मैं”

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  2. Anurag Shukla

    👏👏👏

  3. Anurag Shukla Avatar
    Anurag Shukla

    👌👌

  4. पिता जी और हनुमान जी के संवाद को आपने दोहे में बहुत ही अच्छे से पिरोया है काबिले तारीफ

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