सुबह का चाय

सुबह का चाय
बड़ा हीं मीठा ।
मीठी सोच
विचार भी मीठा।।
गमी खुशी से दूर कहीं
कवियों का संसार भी मीठा।
सुप्रभात विनयचंद आखे
सावन का परिवार भी मीठा।।

Comments

5 responses to “सुबह का चाय”

  1. vikash kumar

    Jay ram jee ki

  2. Pragya

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति

  3. सावन परिवार में ऐसी ही मिठास बनी रहे

  4. कवियों का संसार ऐसे ही मीठा है यहां हमारी दुआ है

  5. आपकी कविता मे मीठा शब्द प्रेम को दर्शाता है। 

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