इतने मशरूफ हो गए हम
औरों में ए- ज़िंदगी…
कि भूल ही गए…
तुझ पर हमारा भी तो
कोई हक था। 😞😒💔
HEMANKUR❤️
हक़
Comments
10 responses to “हक़”
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बहुत सुंदर
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Good
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वाह, बहुत सुंदर
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ह्रदय स्पर्शी रचना, बहुत सुंदर
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बहुत ही अच्छा खयाल बेहतर रचना । बस मशरूफ़ की जगह उसे मसरूफ कर दीजिएगा उर्दू में मसरूफ का ही मतलब व्यस्त होना होता है ।
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Maine uploading k baad try kiya tha edit ka.. but edit option nhi mil rha mujhe
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👌
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वाह
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Thanq aap sbhi ko
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बहुत खूब
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