हर उम्मीद जुङी तुमसे हो

जब-तक सांस मेरे तन में रहे
तेरे हाथों में हाथ मेरा हो
हर उम्मीद जुङी हो तुमसे
बस हर क्षण तेरा साथ हो।।
उम्मीदों की सहर हो या
ढलती उम्र की शाम हो
समय का कैसा भी हो पहर
पर लवों पर तेरा ही नाम हो।
कितने दिन बीते ऐसे
साथ रहे अजनबी जैसे
फासला अब और नहीं
तुम बिन कोई ना काम हो।
मन से आपका सम्मान करूं
आप भी मेरा मान रखें
चाहे जितनी भी बाधाएं आएं
हर हाल में तेरा ही मन‌ में ध्यान हो।
आंख खुली ‌या बन्द रहे
सांसों की गति क्यूं न मंद रहे
पर तेरा ही मनन करूं मन में
तुझसे ही जुङा हर काम हो।
आश तुझी से पूरी हो
मरूं तो मांग सिंदूरी हो
तुझसे न कोई दूरी हो
तुझसे ही जुङा जीवन का तार हो।

Comments

8 responses to “हर उम्मीद जुङी तुमसे हो”

  1. Divya Avatar

    मुझे ये लाइन बहुत अच्छी लगी – 
    समय का कैसा भी हो पहर
    पर लवों पर तेरा ही नाम हो।

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

  2. Suman Kumari

    धन्यवाद

  3. शानदार अभिव्यक्ति

    1. Suman Kumari

      सादर आभार

  4. अति उत्तम रचना

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद सर

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