हर दिन हम अच्छे होते जायेंगे

हर दिन हम अच्छे होते जायेंगे
बहुत लगाए बाड़ काटों के
अब फूल से कोमल होते जायेंगे

गलत स्पर्धा में हमें नहीं पड़ना
मुरझाये चेहरे अब नहीं गढ़ना
हर चेहरे को सच्ची हंसी से सजायेंगे …

औरों की चीजें बहुत ही भाई
पर मेहनत से घर खूब सजाई
निज मेहनत से हर घर को मह्कायेंगे …

आलसी बन अब हमें नहीं जीना
औरों की गलतियां नहीं सीना
हरी भरी वही धरा फिर वापस लाएंगे …

हर दिन हम अच्छे होते जायेंगे
बहुत लगाए बाड़ काटों के
अब फूल से कोमल होते जायेंगे

Comments

6 responses to “हर दिन हम अच्छे होते जायेंगे”

  1. Geeta kumari

    बहुत सुंदर कविता, सराहनीय प्रस्तुति

    1. Rajeev Ranjan Avatar
      Rajeev Ranjan

      साभार धन्यवाद्

  2. Satish Pandey

    अति उत्तम रचना, लाजवाब सोच

  3. Rajeev Ranjan Avatar
    Rajeev Ranjan

    साभार धन्यवाद्

  4. बहुत सुंदर

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