हलधर धरने पर रहा, आस लगाये बैठ।
मानेगी सरकार कब, सोच रहा है बैठ।
सोच रहा है बैठ, मांग पूरी होगी कब।
अकड़ ठंड से गया, ताप सब छीन गया अब।
कहे लेखनी आज, व्यथित है कृषक भाई,
कुछ तो मानो मांग, दिखाओ मत निठुराई।
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ठीक नहीं थी बात वह, लालकिले में पैठ।
आंदोलन धीमा पड़ा, सोच रहा है बैठ।
सोच रहा है बैठ, सभी नाराज हो गये।
जो अपने थे वही, पराये आज हो गये।
कहे लेखनी सोच, समझकर कदम उठाओ।
सत्य अहिंसा पर चल अपनी मांग उठाओ।
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जनता तो समझी नहीं, आंदोलन का मर्म,
लेकिन अपनी बात को, रखना सबका धर्म।
रखना सबका धर्म, बात जो भी जायज हो।
लोकराज का धर्म , कभी नहीं गायब हो।
कहे लेखनी रखो, लचीलापन दोनों ही।
थोड़ा थोड़ा झुको, आज झुक लो दोनों ही।
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रोटी देता है किसान, सेकूँ रोटी आज,
आंदोलन को चोंच दूँ, सोच रहा है बाज।
सोच रहा है बाज, मुझे फायदा हो जाए।
इधर उधर की बात, देख कृषक मुरझाये।
कहे लेखनी आज, जरूरत आन पड़ी है,
सुलह बने अब यही, जरूरत आन पड़ी है।
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मांग उठाना देश में, नहीं कोई अपराध,
लोकतंत्र की रीत है, रखना अपनी बात।
रखना अपनी बात, और सुनना राजा को,
यही बात जो मधुर बनाती है सत्ता को।
कहे लेखनी इधर, मधुरिमा उधर मधुरिमा,
मांग रही है यही, समन्वय अब भारत माँ।
—— डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय
हलधर धरने पर
Comments
72 responses to “हलधर धरने पर”
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किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर छंदबद्ध रचना, अति उत्तम, संतुलित विचार, संतुलित रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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bahut Sundar kahani
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धन्यवाद जी
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किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना
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बहुत धन्यवाद
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बहुत बढ़िया कविता, किसान आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद
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किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना
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सादर धन्यवाद
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किसान आंदोलन पर बहुत अच्छी प्रस्तुति चाचा जी
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बहुत धन्यवाद
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वाह अतुलनीय रचना, लेखनी को प्रणाम, छन्द युक्त रचना पढ़कर आनंद आ गया।
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बहुत बहुत धन्यवाद
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आप की कहानी पढ़कर दिल गार्ड बहुत सुंदर रचना
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आपकी रचनाएं पढ़ने के बाद बहुत अच्छा लगता है
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Bahut Sundar rachna
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत सुंदर रचना चाचा जी
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बहुत धन्यवाद
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बहुत सुंदर रचना
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सादर धन्यवाद
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बहुत सुंदर रचना चाचा जी
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बहुत सारा धन्यवाद
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कविता बहुत अच्छी लगी
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत सुंदर रचना लिखी है आपने, बहुत सुंदर समन्वय है।
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सादर धन्यवाद
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बहुत सुंदर कहानी
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बहुत बहुत धन्यवाद
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अत्युत्तम कविता, अत्युत्तम सोच
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बहुत बहुत धन्यवाद
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सुंदर रचना
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बहुत धन्यवाद
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बहुत सुंदर रचना।👌
आपकी लेखनी को सलाम।-
बहुत बहुत धन्यवाद
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अभी के हालातों पर बहुत शानदार रचना 👏👏
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बहुत धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना
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सादर धन्यवाद
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बिल्कुल नपी तुली बातें और बहुत ही संतुलित रचना।
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सादर धन्यवाद
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बहुत सुंदर रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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किसान आंदोलन के दृष्टिगत बेहतरीन रचना
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बहुत धन्यवाद
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बहुत खूब
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बहुत बहुत धन्यवाद
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किसान आंदोलन पर बहुत ही सुन्दर और यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई छंद बद्ध रचना है। किसान आंदोलन का सम्पूर्ण आंखों देखा हाल व्यक्त करती हुई बेहतरीन रचना अति उत्तम लेखन
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बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी
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क्या खूब कहा है
अतिउत्तम-
बहुत धन्यवाद
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वाह अति सुंदर रचना लेखनी को सलाम👌👌
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बहुत बहुत धन्यवाद
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कविता उच्च स्तरीय है बढ़िया और शानदार है। आपकी कविता में वास्तविकता है
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बहुत बहुत धन्यवाद
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रोटी देता है किसान, सेकूँ रोटी आज,
आंदोलन को चोंच दूँ, सोच रहा है बाज। …. किसान आंदोलन में सब किसान हैं यह जरूरी नहीं है, कुछ राजनीति करने वाले भी बैठे हैं। आपने अपनी कविता में इसका भी जिक्र करके कविता की गुणवत्ता में वृद्धि की है। बहुत उम्दा रचना-
बहुत बहुत धन्यवाद
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चित्र को सजीव करती हुई किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर छंद बद्ध काव्य रचना
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बहुत धन्यवाद
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किसान आंदोलन का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है सतीश जी आपने अपनी कविता में अति उत्तम रचना।
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सादर धन्यवाद
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वाह, किसान आंदोलन पर यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया है सतीश जी आपने, छंद बद्ध शैली में बहुत सुंदर कविता ,लाजवाब
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बहुत बहुत धन्यवाद
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किसानों के प्रति गहरी संवेदना दर्शाती हुई आपकी यह एक उच्च स्तरीय रचना है “मांग उठाना देश में, नहीं कोई अपराध,
लोकतंत्र की रीत है, रखना अपनी बात।” वाह, छंद युक्त कविता में एक प्रोफेशनल कवि की भांति आपने किसानों के मन की बात प्रस्तुत की है। किसान आंदोलन पर यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बहुत उत्कृष्ट रचना ,बहुत खूब-
इस लाजवाब समीक्षा हेतु सादर आभार
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बहुत खूब, बहुत शानदार रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद
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अत्यंत ही उत्कृष्ट
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बहुत धन्यवाद
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बहुत सुन्दर कविताओं का संग्रह
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