हां मान लेता हूं ,
अब नहीं होता ,पहले जैसा,
बार-बार वो इजहार करना ,
मगर मैं उस कस्तूरी-सा
जो कपड़ा फट जाए ,
मगर खुशबू नहीं छोड़े।
हां मान लेता हूं…
Comments
12 responses to “हां मान लेता हूं…”
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Sunder
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत खूब
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Thank you
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बहुत ख़ूब
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धन्यवाद मैम🙏
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सुन्दर उपमान, सुन्दर कविता
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बहुत बहुत धन्यवाद सर
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बहुत ही सुन्दर भाव प्रकट हुआ है।
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धन्यवाद जी 🙏
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सुन्दर
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बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी
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