22 Comments

  1. ना साधन है ना रोटी है,,
    निज घर जाने को मजबूर।
    वाह वाह, यह लेखन प्रतिभा यूँ ही सदैव निखरती रहे। एक उच्चस्तरीय कविता।
    बहुत खूब

  2. बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏 आपकी प्रेरणादायक समीक्षा से मेरी
    लेखनी को नई दिशा और ऊर्जा मिलती है। बहुत बहुत आभार 🙏

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