अपनो से कैसी प्रतियोगिता हम हार जाएंगे
आँगे बढ़ेगे अपने हम मल्हार गाएंगे
तुम्हारी ऊंचाइयों की छाँव में रहकर हम
जीने के लिए तुमसे उपहार पाएंगे
हार जाएंगे
Comments
4 responses to “हार जाएंगे”
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waah, बहुत खूब
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अति उत्तम
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अपनों से प्रेम बनाए रखने तथा उनसे हार जाने की बात कहते हुए कवि अपने कोमल ह्रदय का चित्र प्रस्तुत कर रहा है
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वाह
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