18 Comments

  1. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति। मातृभाषा हिंदी के सम्मान में हिंदी दिवस पर प्रस्तुत सुन्दर कविता है यह।

  2. कविता तो अच्छी है पर आपने यह कविता 12 अगस्त को भी डाली थी आज दोबारा पोस्ट कर रही हैं
    क्यों?
    प्राणदायिनी नारी कविता तथा हमारी संवेदना उसको भी आपने अलग अलग डेट में पोस्ट की थीं आप ऐसा किस कारण करती हैं?

      1. और हाँ सावन आप से पूर्व मुझे प्राणदायनी के लिए आगाह कर चुका है मैने उसका प्रतिउत्तर भी दिया है प्राण दायणी और संवेदना के लिए

      2. मैंने नाव पतवार, प्राणदायनी और संवेदना के लिए कहा पर माफ कीजिए सच कहना ही नहीं चाहिए था मुझे यह ऐप तो आप सबका है मुझे अपनी सलाह देनी नही चाहिए थी..
        आप क्यों जाएंगी मैं ही चला जाता हूँ

    1. और अगर कोई कविता मैनें दुवारा पोस्ट भी की तो वो भूल वश।
      मेरी यह मंशा कभी नहीं रही कि मुझे इससे कुछ फायदा हो ।हर उपाधि आप जैसे योग्य, सचेत और सिर्फ कमी उजागर करने वालो को मुबारक।
      ध्यान रखने के लिए आपको भी सादर आभार ।

      1. मैं तो वैसे भी किसी प्रतियोगिता में भाग नहीं लेता योग्य तो आप लोग हैं.
        जिन्हें मैं फालो करता हूं

Leave a Reply