मंगल मूर्ति हे हनुमान
बारम्बार तुम्हें प्रणाम
तुझसे संभव सारे काम
कष्ट हटे मन को आराम
सेवा का संचार तुम्हीं हो
जग का सद्व्यवहार तुम्हीं हो
श्रृजन का आधार तुम्हीं हो
हर जन का आभार तुम्हीं हो
संभव सब जब है तेरा सहारा
मेरा हितैषी तूं ही मेरा सहारा
जपता रहूं तुम्हें हर सुबह हर शाम
इतना रहे प्रभु बस हमपे ध्यान
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