होली की टोली

होली पे मस्तों की देखो टोली चली,
रँगने को एक दूजे की चोली चली,
भुलाकर गमों के भँवर को भी देखो,
आज गले से लगाने को दुनीयाँ चली,
हरे लाल पिले गुलाबी और नीले,
अबीर रंग खुशयों के उड़ाने चली,
भरकर पिचकारी गुब्बारे पानी के,
तन मन को सबके भिगाने ज़माने के,
हर गली घर से देखो ये दुनियां चली॥
राही (अंजाना)

Comments

4 responses to “होली की टोली”

  1. Shruti Avatar
    Shruti

    Waah holi hai

  2. राम नरेशपुरवाला

    वाह

  3. Abhishek kumar

    Wow

  4. Pratima chaudhary

    सुन्दर प्रस्तुति

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