फ़िज़ाओं के बदलने का इंतज़ार..

‘फ़िज़ाओं के बदलने का इंतज़ार किसको है,
रुसवा शख्सियत हूँ मैं ऐतबार किसको है..
आज दर-बदर हूँ तो ये भी सोचता हूँ,
चलो देखता हूँ मुझसे प्यार किसको है..’

– प्रयाग

मायने :
रुसवा – बदनाम

Comments

12 responses to “फ़िज़ाओं के बदलने का इंतज़ार..”

  1. बहुत सुंदर, बहुत खूब, आपकी कविताओं की बात ही निराली है। वाह

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  2. Geeta kumari

    वाह, बहुत सुंदर

    1. धन्यवाद जी

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  3. मोहन सिंह मानुष Avatar

    बहुत सुंदर पंक्तियां
    बुरे समय में ही पता चलता है
    निस्वार्थ प्रेम करने वाले कितने हैं और मतलबी लोग कितने।

    1. बिल्कुल सही अर्थ तक पहुँचे आप..धन्यवाद आपका

  4. Praduman Amit

    वाह जनाब उम्मीद की चिराग जलाए बैठे है।
    चलो देखते है रहमत की बरसात कब होती है।।

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  5. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    बधाई हो धर्मानी जी

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