2021

उठती रहेगी
इक लहर
सागर से निरंतर
जो समाहित कर लेगी
हर पीड़ा
जो दी बीते वर्ष ने
हर बार होगी
इक नईं हिलोर
जो देगी हौंसला
सतत् नवीन
जीवन जीने की
नववर्ष में।


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12 Comments

  1. Pragya Shukla - January 1, 2021, 4:00 pm

    वाह अनु..
    कम शब्दों में सुंदर अभिव्यक्ति

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 1, 2021, 7:26 pm

    बहुत खूब

  3. Geeta kumari - January 1, 2021, 8:21 pm

    गागर में सागर भरती हुई रचना है आपकी अनु जी , बहुत सुंदर

  4. vivek singhal - January 1, 2021, 8:39 pm

    बहुत खूब अनु जी आपकी रचना भी बहुत अच्छी है

  5. Satish Pandey - January 1, 2021, 9:59 pm

    बहुत सुंदर रचना है, अति उत्तम

  6. poonam agrawal - January 2, 2021, 7:36 am

    Bahut khoob kaha h aapne

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