उठती रहेगी
इक लहर
सागर से निरंतर
जो समाहित कर लेगी
हर पीड़ा
जो दी बीते वर्ष ने
हर बार होगी
इक नईं हिलोर
जो देगी हौंसला
सतत् नवीन
जीवन जीने की
नववर्ष में।
2021
Comments
12 responses to “2021”
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वाह अनु..
कम शब्दों में सुंदर अभिव्यक्ति-

धन्यवाद प्रज्ञा
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बहुत खूब
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शुक्रिया जी
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गागर में सागर भरती हुई रचना है आपकी अनु जी , बहुत सुंदर
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बहुत आभार
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शुक्रिया जी
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बहुत सुंदर रचना है, अति उत्तम
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शुक्रिया जी
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Bahut khoob kaha h aapne
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Thanks a lot poonam g
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