“ख़त” #2Liner-102

ღღ__यूँ भी कई बार “साहब”, मोहब्बत का सिला मिला मुझे;
.
कि मेरे ख़त के जवाब में, मेरा ही ख़त मिला मुझे!!…..#अक्स

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जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

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