कदम कदम बढ़ा रहे हैं,
अपनी छाती अड़ा रहे हैं,
कश्मीर की धरती पर वो सैनिक अपनी,
माँ का गौरव बढ़ा रहे हैं,
तोड़ रहे है दुश्मन पल पल,
सरहद की दीवारे हैं,
वीर हमारे इनको घुसा के धूल चटा रहे है,
जो साथ में रहकर साले पीठ में छुरा घुसा रहे हैं,
देश के जवान सामने से इनको इनकी औकात दिखा रहे हैं॥
राही (अंजाना)
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