Ghazal

चिर परिचित जब कोई आ टकराता ख्वाब में,
फिजा का हर रंग तब घुल जाता शवाब में।
स्वप्न सुनहरा पलकों पर घर कर लेता,
रात छोटी पर जाती ख्यालों के ठहराव में।
वक्त का फासला मिट जाता एक सांस में,
कोई फर्क ना रहता उस मोड़ इस पड़ाव में।
धुंधली सी सही चंद तस्वीरें उभर आती,
जो कभी दूर छुटा वक्त के बहाव में।
ख्यालों के साथ साथ रात झुमने लगता,
ऐसा नशा नहीं मिलता कभी शराब में।

Comments

19 responses to “Ghazal”

    1. Kumari Raushani

      Thank you

  1. Kumari Raushani

    Thank you

    1. Kumari Raushani

      Thank you

  2. Kumari Raushani

    Thank you sir

    1. Kumari Raushani

      Thank you sir

  3. Deovrat Sharma Avatar

    धुंधली सी सही चंद तस्वीरें उभर आती,,,, beautiful

    1. Kumari Raushani

      Thank you sir

    1. Kumari Raushani

      Thank you

    1. Kumari Raushani

      Thank you

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी Avatar

    वाह बहुत सुंदर रचना

    1. Kumari Raushani

      Thanks

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