Ghazal

Ghazal

चिर परिचित जब कोई आ टकराता ख्वाब में,
फिजा का हर रंग तब घुल जाता शवाब में।
स्वप्न सुनहरा पलकों पर घर कर लेता,
रात छोटी पर जाती ख्यालों के ठहराव में।
वक्त का फासला मिट जाता एक सांस में,
कोई फर्क ना रहता उस मोड़ इस पड़ाव में।
धुंधली सी सही चंद तस्वीरें उभर आती,
जो कभी दूर छुटा वक्त के बहाव में।
ख्यालों के साथ साथ रात झुमने लगता,
ऐसा नशा नहीं मिलता कभी शराब में।

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19 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 20, 2019, 7:52 pm

    Atisunder

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 20, 2019, 7:53 pm

    Sunder

  3. Kumari Raushani - October 20, 2019, 8:02 pm

    Thank you

  4. NIMISHA SINGHAL - October 20, 2019, 9:14 pm

    Wah kya khub likha hai

  5. देवेश साखरे 'देव' - October 21, 2019, 12:57 am

    बहुत खूब

  6. Kumari Raushani - October 21, 2019, 4:23 am

    Thank you sir

  7. Deovrat Sharma - October 21, 2019, 4:15 pm

    धुंधली सी सही चंद तस्वीरें उभर आती,,,, beautiful

  8. nitu kandera - October 21, 2019, 4:16 pm

    Good

  9. Poonam singh - October 21, 2019, 10:10 pm

    Nice

  10. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 25, 2019, 5:17 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

  11. Abhishek kumar - November 25, 2019, 12:15 am

    वाह

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