चांद सा मुखड़ा है तेरा,
समंदर से गहरी है आंखें तेरी,
जुल्फें हैं घनेरी तेरी
जो बिखर जाए तो
दिन में रात हो जाए,
चाल है मतवाली तेरी
जिस पर किसी का भी
दिल फिसल जाए,
क्या नूर पाया है तूने,
कयामत हो तुम बस कयामत हो,
ऊपर वाले ने फुर्सत से बनाया है तुझे,
क्या कमाल हो तुम बस कमाल हो,
तुझ पर मेरा दिल आया है,
बस इतनी सी गुजारिश है मेरी,
कुबूल कर लो मुहब्बत मेरी |
Chand sa mukhara hai tera
Comments
11 responses to “Chand sa mukhara hai tera”
-

वाह
-

Thanks
-
-

Nice
-

Thanks
-
-
Nice
-

Thanks
-
-

सुन्दर रचना
-

Thanks
-
-

वाह बहुत सुंदर
-

Wah kya khub
-
सुन्दर
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.