कभी हीर ने मुझे राँझा कहकर पुकारा था,
इश्क़ मे मैने खुद को हीरे- सा तराशा था।
दुनिया की खातिर वह तो मुझे ठुकरा गये,
जीते जागते इन्सान को पत्थर-सा बना गये।
कौन यहाँ इस पत्थर को अब भगवान मानता है,
तू भी तो नही कोहिनूर की कीमत को जानता है।
कोहिनूर
Comments
12 responses to “कोहिनूर”
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Nice
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Thx
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बहुत सुन्दर
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Thx
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Good
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Thx
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Welcome
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Good
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Thx
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Good one
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Thank u
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Gajab
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