एक दौर वो भी गुजरा है

एक दौर वो भी गुजरा है!
जब हम कागज और कलम
लेकर सोते थे।

यादों में पल-पल भीगा
करती थीं पलकें ,
अभिव्यक्ति के शब्द
सुनहरे होते थे।

ना दूर कभी जाने की
कसमें खाई थीं
मिलने के अक्सर वादे
होते रहते थे।

कोई यूं ही कवि
नहीं बनता है यह सच है
हम भी तो पहले
कितना हंसते रहते थे।

Comments

18 responses to “एक दौर वो भी गुजरा है”

  1. This comment is currently unavailable

  2. सुन्दर स्वाभविक

    1. शुक्रिया

  3. Antariksha Saha Avatar
    Antariksha Saha

    Es pathar dil samaj main achi kavita.padh hasna kabhi na sochna

    1. Antariksha Saha Avatar
      Antariksha Saha

      Keep it up behen

      1. धन्यवाद

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