ख्वाहिशों के समंदर…

तेरे-मेरे बीच में वो पहले जैसी बात नहीं रही।
ना रही वो बातें, वो मुलाकात नहीं रही।
ख्वाहिशों के समंदर पड़ गए सूखे-सूखे
रीत में प्रीत में वो पहले जैसी बात नहीं रही।
मुश्किलें अब सजा नहीं लगतीं
ख्वाहिशों में भी वो पहले जैसी बात नहीं रही।
गजब का फ़ितूर था हम दोनों के दर्मियां
आफतों में अब पहले जैसी बात नहीं रही।
आशियाना भी रास नहीं आता
लोगों में वो पहले जैसी बात नहीं रही।

Comments

11 responses to “ख्वाहिशों के समंदर…”

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  2. Pragya Shukla

    🙏

  3. Rajiv Mahali Avatar
    Rajiv Mahali

    सुन्दर

    1. Pragya Shukla

      🙏

  4. भावपूर्ण अभिव्यक्ति

  5. बात है वह पहले जैसी बात नहीं रही बहुत सुंदर

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