8 Comments

  1. अन्तश्चेतना, ईश्वरीय सत्ता से तादात्म्य स्थापित कर उसे खोजते हुए, उसे मानव-मानव के बीच प्रेम की सुरम्यता में पा रही है, श्लेष का सुन्दर प्रयोग हुआ है, शब्द युग्मों छटा कविता को जीवंत कर रही है.

  2. बिल्कुल सर !परमात्मा का निवास स्थान इंसान के अंदर ही होता हैं। तर्कपूर्ण व यथार्थ परक … बेहतरीन प्रस्तुति

  3. आत्मा में परमात्मा को दिखाती हुई कवि की सोच उत्तम है।
    अलंकार का सुन्दर प्रयोग

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