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  1. ‘झूठ के बीज बोये बेईमान’ के रूप में अनुप्रास का सुंदर प्रयोग हुआ है। कविता में क्षेत्रीय बोली का सहज प्रयोग, ‘नेकी करने वाले को बना दिए हैवान’ में ‘दिए’ क्षेत्रीय रूप में है। बहुत सुंदर भाव हैं।

  2. व्यंग्यात्मक शैली और वर्तमान में जो हो रहा है उस पर शानदार कटाक्ष
    “बुरी नजर वाले का मुंह है गौरा
    नेकी नेकी करने वाले को बना दिए हैवान”
    बहुत ही बेहतरीन!
    बहुत ही लाजवाब प्रस्तुति! बधाई हो! 😊

  3. अनुप्रास अलंकार के साथ व्यंग भी किया है कवि ने इस कारण शिल्प बहुत मजबूत है तथा भाव पक्ष और कला पक्ष भी सराहनीय है

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