9 Comments

      1. आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, मेरी ओर से प्रेम स्नेह, यथायोग्य सादर नमस्कार है। अभिषेक जी ।

    1. बहुत-बहुत हार्दिक धन्यवाद ।अभिषेक जी !कई बार गलतफहमी की वजह से रिश्तो में दरार आ जाती है
      आप भी अपनी जगह पर सही थे और सतीश जी भी।
      पहली बार मुझे भी कुछ-कुछ ऐसा ही आभास हुआ था जैसा सतीश जी को हुआ होगा ,मगर मैं चाहता हूं आप ऐसे ही गलतियां निकाले और निष्पक्ष भाव से आलोचना करें ताकि हम अपनी व्याकरण की त्रुटियों को सुधार सकें ,नहीं तो हम ये गलतियां बार-बार करेंगे और ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि आप नकारात्मक टिप्पणी ही करते हैं ,अगर कमी ना हो तो आप सकारात्मक भी करते हैं
      🙏🙏🙏

    2. पहल करने के लिए धन्यवाद अभिषेक जी।
      अब सभी आपको समझ गए हैं अब से कोई गलतफहमी नहीं होगी।

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