पढ़े-लिखे बेरोजगारों की
फौज खड़ी है, चारों ओर ,
कैसे हल निकले अब इसका
घटा छा रही है घनघोर ।
जाग देश के शीर्ष सिंहासन
कुछ ऐसी अब नीति बना,
युवा फूल खिलने लग जाएँ
श्रृंगार करें भारत माँ का।
बेरोजगारी
Comments
10 responses to “बेरोजगारी”
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चिंतन का विषय है।
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सादर धन्यवाद शास्त्री जी
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वाह।
बेहद संवेदनशील मुद्दा हम युवाओं के जीवन का।-
जी बहन,
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भारत की दशा कुछ ऐसी ही है आज ।।
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धन्यवाद
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भारत के शीर्ष पदों पर बैठे हुए लोगों का आह्वाहन करती, देश की युवा पीढ़ी का चिंतन करती हुई बेहद खूबसूरत रचना ।
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सादर आभार
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बहुत खूब
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धन्यवाद
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