जिंदगी और मौत

हालत कुछ आज ऐसी बनी
चलती जिंदगी से मौत उलझ गई,
अकड़ कर वो कुछ यूं खड़ी
मानो जिंदगी से बड़ी हो गई।।

ऐ मौत, यूं ना तू मुझपे अकड़
बाकी है मेरी अभी सांसो पे पकड़
ना एक कदम जिंदगी पीछे हटी
मौत भी खड़ी गुर्राती गई।।

ना सांसे तेरी अपनी होंगी
जिस दिन वक़्त मेरा आएगा,
ऐ जिन्दगी, तू याद रखना
तूझपे मेरा एक वार बाकी है।।

लोगो के दिलो मै अभी
मेरे हिस्से का प्यार बाकी है,
माना वक़्त आएगा तेरा एक दिन
पर मेरा तो अभी दौर बाकी है।।

यूं डट कर लडी आज जिंदगी
हारती हुई मौत चली गई,
हालत कुछ आज ऐसी बनी
चलती जिंदगी से मौत उलझ गई।।
AK

Comments

14 responses to “जिंदगी और मौत”

  1. Prayag Dharmani

    बहुत बढ़िया

    1. धन्यवाद् सर

    1. Anuj Kaushik

      Thanks sir

  2. वाह वाह जी

    1. Anuj Kaushik

      धन्यवाद् सर

    1. Anuj Kaushik

      Thanks

  3. Geeta kumari

    सुंदर प्रस्तुतीकरण

    1. Anuj Kaushik

      शुक्रिया जी

    1. Anuj Kaushik

      धन्यवाद जी

    1. Anuj Kaushik

      Thanks sir

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