ये राजनीति बड़ा ही मीठा जहर,
मानवता पर बड़ा ढहाती कहर ,
होते दंगे ,बिखर जाती लाशें,
फिर मिडिया हमारी,
दिखाती दलाली,
हाए! हिन्दू मर गया ,
हाए! मुस्लिम मर गया,
पर कौन बताए?
और कौन समझाए ?
केवल इंसान मरता है,
तुम्हारे तुच्छ मंसूबों से,
केवल इंसान मर गया,
हां ,इंसान मर गया।
तुच्छ राजनीति
Comments
16 responses to “तुच्छ राजनीति”
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True
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🙏 धन्यवाद जी! बिल्कुल , मगर समझने को कोई तैयार नहीं हैं।
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👍
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🙏
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अत्यंत सच कहा है मानुष सर आपने, वाह, बेहतरीन
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सादर आभार सर 🙏
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Very true
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बहुत बहुत धन्यवाद मैडम जी 🙏
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सच कहा
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सादर धन्यवाद
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सुंदर
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सादर धन्यवाद
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सुन्दर अभिव्यक्ति
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Satya vachan
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सादर आभार
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