हैसियत बना डाली

‘अब इतनी ऊँची अपनी हैसियत बना डाली,
कभी न खत्म हो वो कैफियत बना डाली..
तेरी यादें, तेरी हसरत का वो एहसास जुदा,
पुरानी चीज़ें थी बस मिलकियत बना डाली..’

– प्रयाग

मायने :
कैफियत – उल्लेख
मिलकियत – प्रॉपर्टी

Comments

12 responses to “हैसियत बना डाली”

  1. खूबसूरत खयाल

  2. बहुत सुंदर

    1. बहुत शुक्रिया

    1. आपके इस प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद

  3. बहुत ही सुन्दर ।
    निर्माण की प्रवृत्ति एक खास पहचान दिलाती है
    अपवादों में भी जीना सिखाती है

    1. बहुत शुक्रिया आपका

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