ठहरे पानी के ही मानिंद..

‘ठहरे पानी के ही मानिंद अपनी फितरत थी,
न जगह छोड़ी और न ही किनारे तोड़े..’

– प्रयाग

मायने :
मानिंद – तरह/समान

Comments

16 responses to “ठहरे पानी के ही मानिंद..”

    1. आभार आपका

  1. बहुत सुंदर

    1. बहुत शुक्रिया आपका

  2. बहुत खूब बहुत ही लाजबाब

    1. धन्यवाद सर

  3. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. आभार आपका

    1. Prayag Dharmani

      🙏🙏

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