नैन में अब भी घुमड़ते मेघ हैं

कौन कहता है कि बारिश थम गई
नैन में अब भी घुमड़ते मेघ हैं,
रो रहा आकाश शायद अब नहीं
यूँ तड़पती बून्द परिचय दे रही।
जिंदगी सुनसान सड़कों सी बनी
लालसाएँ ढेर सारी शेष हैं।
और कुछ हो या न हो इतना तो है
बस इरादे आज भी सब नेक हैं।

Comments

19 responses to “नैन में अब भी घुमड़ते मेघ हैं”

  1. Praduman Amit

    बहुत खूब पांडे जी

    1. धन्यवाद सर

  2. , अतिसुंदर रचना

    1. सादर धन्यवाद सर

  3. Wow , सतीश जी आपने कवि के दर्द को भी कितनी सुन्दर पंक्तियों में ढाल दिया है…. आपसे बहुत कुछ सीखना पड़ेगा।सैल्यूट 🙋

    1. इस बहुत ही सुंदर समीक्षा और टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद। अभिवादन

      1. Geeta kumari

        स्वागत है

  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

    1. सादर धन्यवाद जी

  5. बहुत बढ़िया कविता

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  6. Indu Pandey

    बहुत बढ़िया वाह जी

    1. Satish Pandey

      Thanks ji

  7. Devi Kamla

    काफी अच्छा लिखा

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

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