दो पल का साथ,
पर था तो सही।
मुस्कुराए थे हम ,
कभी तो सही ।
क्यों दोष दें तेरे जाने का,
चंद लम्हे थे न मीठे।
तेरे साथ ,पर थे तो सही।
चंद लम्हें तेरे साथ
Comments
8 responses to “चंद लम्हें तेरे साथ”
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बहुत ही अच्छी कविता ।
सरल शब्दों में अपनी व्यथा का बखान-

बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी
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भावपूर्ण
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बहुत बहुत धन्यवाद प्रज्ञा जी
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सुंदर
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Thank you sir
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सुन्दर पंक्तियाँ
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धन्यवाद सर
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