बहुत झगड़े हम रात भर
दिल से अपने ,
मगर बदनामी करे,
मनमानी करे,
दिल मेरा ,
तुम्हारी ही गुलामी करें ,
आखिर आना ही पड़ा लौटकर ,
तेरे शहर में,
तेरी गलियों में,
हसरत ए दीदार को तेरे ,
दिल मेरा बदनामी करे,
दिल मेरा मनमानी करें।
हसरत ए दीदार
Comments
14 responses to “हसरत ए दीदार”
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सुंदर
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सादर धन्यवाद 🙏
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Very true
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बहुत बहुत आभार 🙏
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बहुत बहुत आभार
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,सुंदर
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धन्यवाद सर
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सुन्दर
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धन्यवाद जी
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गंभीर प्रस्तुति
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धन्यवाद जी
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धन्यवाद जी
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