हसरत ए दीदार

बहुत झगड़े हम रात भर
दिल से अपने ,
मगर बदनामी करे,
मनमानी करे,
दिल मेरा ,
तुम्हारी ही गुलामी करें ,
आखिर आना ही पड़ा लौटकर ,
तेरे शहर में,
तेरी गलियों में,
हसरत ए दीदार को तेरे ,
दिल मेरा बदनामी करे,
दिल मेरा मनमानी करें।

Comments

14 responses to “हसरत ए दीदार”

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      सादर धन्यवाद 🙏

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत आभार 🙏

  1. This comment is currently unavailable

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      बहुत बहुत आभार

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    धन्यवाद सर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी

  3. गंभीर प्रस्तुति

  4. This comment is currently unavailable

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      धन्यवाद जी

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