जब सब के भीतर तु है समाया
तब भी मुझे कैसे तु नजर ना आया
ख़तावार हूँ मैं
खुद को ना इसका पात्र बना पाया।
ख़तावार
Comments
10 responses to “ख़तावार”
-
वाह, परमसत्ता के विषय मे सुन्दर अभिव्यक्ति, बहुत खूब
-

आभार
-
-

👏👏
-

🙏
-
-
सुंदर
-

धन्यवाद
-
-
बहुत सुंदर अभव्यक्ति
-

धन्यवाद
-
Very nice👏😊👍
-

Thanks
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.