ख़तावार

जब सब के भीतर तु है समाया
तब भी मुझे कैसे तु नजर ना आया
ख़तावार हूँ मैं
खुद को ना इसका पात्र बना पाया।

Comments

10 responses to “ख़तावार”

  1. वाह, परमसत्ता के विषय मे सुन्दर अभिव्यक्ति, बहुत खूब

  2. बहुत सुंदर अभव्यक्ति

  3. Anu Singla

    धन्यवाद

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