सावन की सभा सजी है,
शुक्रवार की शाम है ।
महफ़िल में मित्र मिले है ,
सबके सुंदर – सुंदर नाम हैं ।
मित्र बने अनजाने थे सब,
अब लगते हैं, पहचाने से..।
सावन की सभा
Comments
22 responses to “सावन की सभा”
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वाह, क्या बात है, बहुत बढ़िया पंक्तियाँ
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बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
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वाह
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Thank you very much dear pragya
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मित्र बने अनजाने थे सब,
अब लगते हैं, पहचाने से..।
वाह, बहुत ही सुंदर और आत्मीय अभिव्यक्ति। लेखनी का अभिवादन-
आपकी प्रेरक और सुंदर समीक्षा के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया सतीश जी । ये मेरा बहुत उत्साह वर्धन करती हैं।🙏
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बहुत सुंदर पंक्तियां
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बहुत बहुत शुक्रिया प्रतिमा जी
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वाह जी वाह,
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शुक्रिया चंद्रा जी
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👌✍✍
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Thank you
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बिल्कुल सत्य
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बहुत बहुत धन्यवाद आपका भाई जी 🙏
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बहुत खूब
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धन्यवाद पीयूष जी
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BAHUT KHOOB
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शुक्रिया इंदु जी🙏
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बहुत खूब, वाह
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बहुत बहुत आभार मैम🙏
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Atisundar
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Thank you very much Isha ji
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