औरत का सम्मान ,
कुछ इस कदर किया जाए
सरक जाए गर पल्लू गलती से,
तो, झुका नजर को लिया जाए ।
औरत का सम्मान
Comments
13 responses to “औरत का सम्मान”
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मातृवत् परदारेषु का भाव
बहुत खूब विचारणीय तथ्य-
बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏
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बहुत खूब शानदार पंक्तियाँ
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बहुत बहुत धन्यवाद सर
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कमाल की लेखनी वाह
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Thank you Piyush ji for your valuable compliment.
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गीता जी, आपने इस कविता में उच्चस्तरीय विचार को प्रस्तुत किया है। जय हो। आपकी यही विलक्षण प्रतिभा आपको विशिष्ट कवि बनाती है। वाह
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समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया सतीश जी ।आपकी सराहना से ही मेरी लेखन को प्रोत्साहित करती हैं । बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
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जबरदस्त, जितनी तारीफ की जाए कम है।
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बहुत सारा धन्यवाद कमला जी 🙏
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Good
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Thank you Pragya
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सुन्दर
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