औरत का सम्मान
औरत का सम्मान ,
कुछ इस कदर किया जाए
सरक जाए गर पल्लू गलती से,
तो, झुका नजर को लिया जाए ।
औरत का सम्मान ,
कुछ इस कदर किया जाए
सरक जाए गर पल्लू गलती से,
तो, झुका नजर को लिया जाए ।
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मातृवत् परदारेषु का भाव
बहुत खूब विचारणीय तथ्य
बहुत बहुत धन्यवाद भाई जी 🙏
बहुत खूब शानदार पंक्तियाँ
बहुत बहुत धन्यवाद सर
कमाल की लेखनी वाह
Thank you Piyush ji for your valuable compliment.
गीता जी, आपने इस कविता में उच्चस्तरीय विचार को प्रस्तुत किया है। जय हो। आपकी यही विलक्षण प्रतिभा आपको विशिष्ट कवि बनाती है। वाह
समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया सतीश जी ।आपकी सराहना से ही मेरी लेखन को प्रोत्साहित करती हैं । बहुत बहुत धन्यवाद सर 🙏
जबरदस्त, जितनी तारीफ की जाए कम है।
बहुत सारा धन्यवाद कमला जी 🙏
Good
Thank you Pragya
सुन्दर