लफ्ज ना हों

जरा सोंच कभी हम ना हों
तेरी जिंदगी में कोई गम ना हों
कैसे कटेगा वक्त तेरा
अगर जुबां हो पर लफ्ज ना हों.

Comments

5 responses to “लफ्ज ना हों”

  1. Geeta kumari

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  2. लाजवाब लेखन, वाह वाह

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