12 Comments

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति ।
    सच कहा आपने ।
    किसी का स्थायी ठीकाना नहीं
    फिर क्यूँ न मधुरता को ही अभिव्यक्ति बनाया जाय।

  2. बस , प्यार के दो मीठे
    बोलों का रह जाना..
    बस, यही है मेरी ,
    ज़िन्दगी का अफ़साना।
    बहुत सुंदर बहुत लाजवाब अभिव्यक्ति। अतीव सुन्दर

    1. सुन्दर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी 🙏
      प्रेरक समीक्षा हेतु बहुत बहुत आभार सर ।

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