13 Comments

  1. ये कविता मैंने एक चुनौती के तहत स्वीकार की है । मैं दिल्ली में एक शिक्षिका हूं और मेरी सह शिक्षिकाओं ने मुझे दोस्ती और मुहब्बत का फर्क समझाती हुई कविता लिखने को बोला था ।यदि आपको मेरी कविता पसंद आई हो तो कृपया अपने-अपने विचार साझा करें
    🙏 🙏 धन्यवाद

  2. कवि गीता जी द्वारा चुनौती स्वीकार कर मोहब्बत और दोस्ती का अंतर दर्शाती बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ सृजित की हैं। कवि का कथ्य सुस्पष्ट और सही है। मोहब्बत दिलों का पवित्र जुड़ाव है, मुहोब्बत एक बार होती है, एक के साथ होती है, सैद्धांतिक तौर पर मुहोब्बत की परिणिति जीवन साथी बनने और दाम्पत्य जीवन से जुड़ने में होनी चाहिए परंतु इस मुकाम तक पहुंचने में कई मानवजन्य, पुरातनता जन्य कठिनाइयां भी सामने आती हैं। किसी को मोहब्बत में मुकाम हासिल हो पाता है किसी को नहीं। उसमें दिल टूटते हैं, दुश्वारियों का सामना करना पड़ता है, समाज की पैनी नज़रों का शिकार होना पड़ता है। लेकिन दोस्ती अलग है, उसमें दिल टूटने आदि बातें नहीं होती हैं। दोस्त एक दूसरे की कठिनाइयों में मदद करते हैं एक दूसरे को प्रोत्साहन देते हैं।दोस्ती में परस्पर सम्मान का जुड़ाव होता है।
    बहुत खूब कविता

  3. वाह सतीश जी आपने मेरी कविता के बारे में इतनी सुन्दर और सटीक समीक्षा दी है कि मुझे बहुत खुशी हो रही है , लगता है कविता लिखना सार्थक रहा ।आप ने पूरी कविता की इतनी सुन्दर व्याख्या की है कि सारी कविता का सार ही समाहित हो गया है ।आपकी इस बहुमूल्य समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद एवम् आभार ।आपकी लेखनी की प्रखरता को प्रणाम ।

  4. सही कथ्य है प्यार और दोस्ती के परिप्रेक्ष्य में..
    यह सत्य है कि दोस्ती निश्छल होती है और प्रेम टेड़ी खीर है…

Leave a Reply