कागज

कागज!!
बड़े काम के हो आप
युगों युगों से
आप पर कलम
अंकित करते आई है,
तमाम तरह का साहित्य।
आप में अब तक का
दुख-सुख, उत्थान-पतन,
आशा-निराशा,
उत्साह-अवसाद,
इतिहास,
सब कुछ अंकित है।
मानव क्या था, क्या है
जीवन कैसा था, कैसा है
सब कुछ आप पर ही
अंकित है।
आप न होते तो
कैसे हम अपना
बीता कल जानते।
आप न होते
कैसे हम सहेजा हुआ
आत्मसात कर पाते।
आप न होते तो
कैसे हम अपनी संवेदना
को अंकित कर पाते।
आप पर अंकित भंडार ही तो
भावी पीढ़ी के लिए
वरदान है,
जीवन जीने का ज्ञान है।
कागज
आपका होना
हमारे लिए वरदान है
आपकी महत्ता का
हमें भान है।
——— डॉ0 सतीश पाण्डेय

Comments

13 responses to “कागज”

  1. वाह सर वाह

    1. बहुत धन्यवाद

  2. बहुत सुंदर

    1. सादर धन्यवाद जी

  3. Geeta kumari

    “कागज आपका होना हमारे लिए वरदान है आपकी महत्ता का
    हमें भान है।” “कागज़” पर कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर रचना ।वाकई में कागज़ एक वरदान ही है । मां सरस्वती का आशीर्वाद ।पुरानी पीढ़ी की जानकारी और भावी पीढ़ी को ज्ञान देने के लिए कागज़ की महत्ता से किसको इन्कार है ।कागज़ पर ही तो अंकित ज्ञान और भावनाओं का भंडार है ।वाह , सर बहुत सुंदर प्रस्तुति

    1. गीता जी आपकी समीक्षा शक्ति काबिलेतारीफ है। आपने इतनी सुन्दर टिप्पणी की है। आप विद्वान तो हैं, यूँ ही आपकी लेखनी की विद्वता बढ़ती रहे। सादर अभिवादन।

      1. Welcome sir 🙏

  4. वाह सर कागज पर बेहतरीन कविता

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  5. वाह सर बहुत खूब

    1. सादर धन्यवाद प्रज्ञा जी

  6. अति सुंदर

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