11 Comments

  1. उस निर्धन बालक को
    औरों के घरों की चमक देख कर,
    ख़ुश होते मैंने देख लिया..
    वाह क्या बात है, कवि गीता जी की लेखनी की प्रबलता इन पंक्तियों में झलक रही है। बहुत जबरदस्त लेखन। कथ्य व शिल्प दोनों ही अतिउत्तम

    1. आपकी सुन्दर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी । आपकी समीक्षा सदैव ही मेरा उत्साह वर्धन करती हैं। अभिवादन सर 🙏

Leave a Reply