हलधर धरने पर

हलधर धरने पर रहा, आस लगाये बैठ।
मानेगी सरकार कब, सोच रहा है बैठ।
सोच रहा है बैठ, मांग पूरी होगी कब।
अकड़ ठंड से गया, ताप सब छीन गया अब।
कहे लेखनी आज, व्यथित है कृषक भाई,
कुछ तो मानो मांग, दिखाओ मत निठुराई।
**************************
ठीक नहीं थी बात वह, लालकिले में पैठ।
आंदोलन धीमा पड़ा, सोच रहा है बैठ।
सोच रहा है बैठ, सभी नाराज हो गये।
जो अपने थे वही, पराये आज हो गये।
कहे लेखनी सोच, समझकर कदम उठाओ।
सत्य अहिंसा पर चल अपनी मांग उठाओ।
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जनता तो समझी नहीं, आंदोलन का मर्म,
लेकिन अपनी बात को, रखना सबका धर्म।
रखना सबका धर्म, बात जो भी जायज हो।
लोकराज का धर्म , कभी नहीं गायब हो।
कहे लेखनी रखो, लचीलापन दोनों ही।
थोड़ा थोड़ा झुको, आज झुक लो दोनों ही।
**************************
रोटी देता है किसान, सेकूँ रोटी आज,
आंदोलन को चोंच दूँ, सोच रहा है बाज।
सोच रहा है बाज, मुझे फायदा हो जाए।
इधर उधर की बात, देख कृषक मुरझाये।
कहे लेखनी आज, जरूरत आन पड़ी है,
सुलह बने अब यही, जरूरत आन पड़ी है।
**************************
मांग उठाना देश में, नहीं कोई अपराध,
लोकतंत्र की रीत है, रखना अपनी बात।
रखना अपनी बात, और सुनना राजा को,
यही बात जो मधुर बनाती है सत्ता को।
कहे लेखनी इधर, मधुरिमा उधर मधुरिमा,
मांग रही है यही, समन्वय अब भारत माँ।
—— डॉ0 सतीश चंद्र पाण्डेय

Comments

72 responses to “हलधर धरने पर”

  1. किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर छंदबद्ध रचना, अति उत्तम, संतुलित विचार, संतुलित रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

  2. किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  3. बहुत बढ़िया कविता, किसान आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  4. किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  5. Ravi Tiwari

    किसान आंदोलन पर बहुत अच्छी प्रस्तुति चाचा जी

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  6. वाह अतुलनीय रचना, लेखनी को प्रणाम, छन्द युक्त रचना पढ़कर आनंद आ गया।

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  7. आप की कहानी पढ़कर दिल गार्ड बहुत सुंदर रचना

    1. TARA DUTT Tiwari

      आपकी रचनाएं पढ़ने के बाद बहुत अच्छा लगता है

    2. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  8. Kamal Tiwari

    बहुत सुंदर रचना चाचा जी

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  9. बहुत सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  10. बहुत सुंदर रचना चाचा जी

    1. Satish Pandey

      बहुत सारा धन्यवाद

  11. NIRANJAN LAL

    कविता बहुत अच्छी लगी

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  12. बहुत सुंदर रचना लिखी है आपने, बहुत सुंदर समन्वय है।

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  13. TARA DUTT Tiwari

    बहुत सुंदर कहानी

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  14. अत्युत्तम कविता, अत्युत्तम सोच

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  15. सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  16. Deepak Kumar

    बहुत सुंदर रचना।👌
    आपकी लेखनी को सलाम।

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  17. Raju Pandey

    अभी के हालातों पर बहुत शानदार रचना 👏👏

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  18. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    अतिसुंदर भाव अतिसुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  19. Harish Joshi

    बिल्कुल नपी तुली बातें और बहुत ही संतुलित रचना।

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  20. Vasundra singh Avatar
    Vasundra singh

    बहुत सुंदर रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  21. किसान आंदोलन के दृष्टिगत बेहतरीन रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  22. Kumar Dheerendra

    बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  23. Geeta kumari

    किसान आंदोलन पर बहुत ही सुन्दर और यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई छंद बद्ध रचना है। किसान आंदोलन का सम्पूर्ण आंखों देखा हाल व्यक्त करती हुई बेहतरीन रचना अति उत्तम लेखन

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद गीता जी

  24. क्या खूब कहा है
    अतिउत्तम

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  25. harish pandey

    वाह अति सुंदर रचना लेखनी को सलाम👌👌

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  26. Aakash Malik

    कविता उच्च स्तरीय है बढ़िया और शानदार है। आपकी कविता में वास्तविकता है

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  27. Arvind Kumar

    रोटी देता है किसान, सेकूँ रोटी आज,
    आंदोलन को चोंच दूँ, सोच रहा है बाज। …. किसान आंदोलन में सब किसान हैं यह जरूरी नहीं है, कुछ राजनीति करने वाले भी बैठे हैं। आपने अपनी कविता में इसका भी जिक्र करके कविता की गुणवत्ता में वृद्धि की है। बहुत उम्दा रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  28. Mamta Sharma

    चित्र को सजीव करती हुई किसान आंदोलन पर बहुत सुंदर छंद बद्ध काव्य रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत धन्यवाद

  29. Deepa Sharma

    किसान आंदोलन का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया है सतीश जी आपने अपनी कविता में अति उत्तम रचना।

    1. Satish Pandey

      सादर धन्यवाद

  30. Anurag Singh

    वाह, किसान आंदोलन पर यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया है सतीश जी आपने, छंद बद्ध शैली में बहुत सुंदर कविता ,लाजवाब

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  31. Seema Chaudhary

    किसानों के प्रति गहरी संवेदना दर्शाती हुई आपकी यह एक उच्च स्तरीय रचना है “मांग उठाना देश में, नहीं कोई अपराध,
    लोकतंत्र की रीत है, रखना अपनी बात।” वाह, छंद युक्त कविता में एक प्रोफेशनल कवि की भांति आपने किसानों के मन की बात प्रस्तुत की है। किसान आंदोलन पर यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई बहुत उत्कृष्ट रचना ,बहुत खूब

    1. Satish Pandey

      इस लाजवाब समीक्षा हेतु सादर आभार

  32. Ramu Joshi

    बहुत खूब, बहुत शानदार रचना

    1. Satish Pandey

      बहुत बहुत धन्यवाद

  33. Nikhil Agrawal

    अत्यंत ही उत्कृष्ट

  34. Satish Pandey

    बहुत धन्यवाद

  35. Suraj Tiwari

    बहुत सुन्दर कविताओं का संग्रह

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