11 Comments

  1. ‘गुत्थियां’ शीर्षक के माध्यम से आपने बहुत सुन्दर रचना की है। आपकी रचना में प्रवाह है, बारीकी है और पूर्णतः मौलिकता है। बहुत खूब

  2. कवि सक्सेना जी आपकी यह रचना बहुत ही सुंदर है। रचना में यथार्थ है, सत्यता है, भाव व शिल्प दोनों ही खूबसूरत हैं।

  3. ज़मीं पे गिरी मिठाई को, उठाकर नहीं खाना है
    वो बोले मिट्टी की काया, मिट्टी में मिल जाना है
    _________व्यक्तित्व के दोहरे मापदंड प्रस्तुत करती हुई आपकी यह रचना पूर्ण मौलिकता लिए हुए है, यथार्थ चित्रण प्रस्तुत करती हुई सुंदर भाव लिए उम्दा प्रस्तुति

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