कैसे जिया जाए जीवन ??

कैसे जिया जाए यह जीवन
नीरस-नीरस लगता जीवन |

बह जाती है सांस कहीं तो
बह जाती है धड़कन |

रूठ जाएं कभी सारे अपने
बन जाएं कभी गैर भी अपने |

उपजे मन में बछोह के बादल
बरसे आंसू बन नैनन |

कैसे जिया जाए जीवन??
कैसे हो जीवन पावन ??

Comments

8 responses to “कैसे जिया जाए जीवन ??”

  1. बहुत दर्द है आपकी रचना में
    उत्तम रचना

  2. vikash kumar

    Great
    JAY ram JEE ki

  3. vivek singhal

    This comment is currently unavailable

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