जल बरसा आकाश से, तृप्त हो गई भूमि,
पौधे फिर से जी उठे, हरी हो गई भूमि।
हरी हो गई भूमि, आज रौनक प्यारी लिख,
उग आई खुशहाली लेकर सुन्दर नख-शिख।
कहे लेखनी रंग भरे प्यारे से यह पल,
ओस रूप में मोती बन बिखरा सा है जल।
प्यारे से पल
Comments
12 responses to “प्यारे से पल”
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वाह अति उत्तम
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बहुत सुंदर
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सर्वश्रेष्ठ कवि बहुत खूब🙏🙏
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बहुत सुंदर
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बारिश के सौन्दर्य का बहुत ही खूबसूरत चित्रण प्रस्तुत किया है आपने अपनी कविता में। छंद शैली में बहुत ही सुन्दर और उम्दा रचना
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वाह, बहुत सुंदर रचना
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उग आई खुशहाली
वाह -
उग आई खुशहाली
वाह -

बहुत सुन्दर रचना
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On the nature very beautiful poem
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बहुत खूब
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जल बरसा आकाश से, तृप्त हो गई भूमि,
पौधे फिर से जी उठे, हरी हो गई भूमि।
हरी हो गई भूमि, आज रौनक प्यारी लिख,
उग आई खुशहाली लेकर सुन्दर नख-शिख।अति सुंदर रचना
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