प्यारे से पल

जल बरसा आकाश से, तृप्त हो गई भूमि,
पौधे फिर से जी उठे, हरी हो गई भूमि।
हरी हो गई भूमि, आज रौनक प्यारी लिख,
उग आई खुशहाली लेकर सुन्दर नख-शिख।
कहे लेखनी रंग भरे प्यारे से यह पल,
ओस रूप में मोती बन बिखरा सा है जल।

Comments

12 responses to “प्यारे से पल”

  1. वाह अति उत्तम

  2. बहुत सुंदर

  3. सर्वश्रेष्ठ कवि बहुत खूब🙏🙏

  4. बहुत सुंदर

  5. Geeta kumari

    बारिश के सौन्दर्य का बहुत ही खूबसूरत चित्रण प्रस्तुत किया है आपने अपनी कविता में। छंद शैली में बहुत ही सुन्दर और उम्दा रचना

  6. वाह, बहुत सुंदर रचना

  7. उग आई खुशहाली
    वाह

  8. उग आई खुशहाली
    वाह

  9. बहुत सुन्दर रचना

  10. vikash kumar

    On the nature very beautiful poem

  11. जल बरसा आकाश से, तृप्त हो गई भूमि,
    पौधे फिर से जी उठे, हरी हो गई भूमि।
    हरी हो गई भूमि, आज रौनक प्यारी लिख,
    उग आई खुशहाली लेकर सुन्दर नख-शिख।

    अति सुंदर रचना

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