ज़िन्दगी की राहें

ज़िन्दगी की राहें,
सदा कुछ सिखाती ही जाएँ।
कुछ लोग हाथ पकड़ कर,
काम निकाल, छोड़ दें झटक कर।
पकड़ कर राह सच्चाई की,
कुछ निभाएँ साथ भी।
रंग-बिरंगी दुनिया है यह,
रंग सभी दिखलाते हैं
कुछ पक्के कुछ कच्चे रंग।
यहां-वहां दिख ही जाते हैं।।
______✍️गीता

Comments

13 responses to “ज़िन्दगी की राहें”

  1. कुछ लोग हाथ पकड़ कर,
    काम निकाल, छोड़ दें झटक कर।
    बहुत सुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      समीक्षा हेतु आभार सर

  2. Satish Pandey

    रंग-बिरंगी दुनिया है यह,
    रंग सभी दिखलाते हैं
    कुछ पक्के कुछ कच्चे रंग।
    यहां-वहां दिख ही जाते हैं।।
    ——– बहुत खूब, अति सुंदर रचना। भावों की गहराई बहुत शानदार है। सुन्दर भाषा सुन्दर शिल्प

    1. Geeta kumari

      इस प्रेरक और उत्साहवर्धक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी, अभिवादन सर

  3. बहुत ही शानदार रचना

    1. बहुत-बहुत धन्यवाद पीयूष जी

  4. वाह गीता जी वाह

    1. सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार कमला जी🙏

  5. vikash kumar

    JAY ram JEE ki

    1. जय श्री राम

  6. अतिसुंदर रचना

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  7. बहुत ही उम्दा अभिव्यक्ति शानदार लेखन

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