करो परिश्रम कठिनाई से

तन है चोला मिट्टी का,
वस्त्र तेरे कोई शान नहीं ।
मिट्टी में मिट्टी मिल जायेंगे ,
वस्त्र तेरे उतार लिये जायेंगे ।
कर लो सदुपयोग नर तन का,
यहीं तो काम आवेंगे ।।
—————————————
जो नर मिट्टी को मिट्टी समझे,
कड़ी -धुप में अन्न उगाते (बीज बोते) ।
वहीं फसल काटते छाँव में ।।
_________________________
करो परिश्रम कठिनाइ से
जब तक पास तुम्हारे तन है ।।3।।
———————————————-

Comments

4 responses to “करो परिश्रम कठिनाई से”

  1. बहुत खूबसूरत रचना

  2. Geeta kumari

    सुंदर रचना

  3. तन है चोला मिट्टी का,
    वस्त्र तेरे कोई शान नहीं ।
    मिट्टी में मिट्टी मिल जायेंगे ,
    वस्त्र तेरे उतार लिये जायेंगे ।
    कर लो सदुपयोग नर तन का,
    यहीं तो काम आवेंगे ।।
    ———————————
    बिल्कुल सही कहा परिश्रम ही काम आता है…

Leave a Reply

New Report

Close